Hello There!

"Love Books to Love Your Thoughts"- My Inner Self

A woman passionate about books and soft Bollywood music sitting by the window shelf under diaphanous curtains is me, Shipra Garg. Born and brought up in Meerut, the city in UP. Since getting married, I have been a wife, daughter-in-law, and mother of two daughters. Just being a housewife was never my outlook. I began my professional role as a tutor, principal in a play school, and then an entrepreneur running an at-home book library. My endearment for writing helps me achieve new horizons as a poet, lyricist, and writer on personal and professional platforms.

Join me on my journey, “one story at a time”

Navigation

About Me

Publications

Achievements

Contact

Featured Articles

Description of school books designed by me

These kindergarten books are designed to ease parents’ concerns about their child’s extra activities.

These books cover almost all the aspects required for the cognitive growth of your child as per their preschool syllabus.

“Stories. Poetry. Reflections.”

मेरे कोट की जेब का सामान

भूल गया हूं गुलाब का फूल रखना कोट की जेब में भूल गया हूं आजकल गुलाब का फूल रखना कोट की जेब मेंअब उसमें नज़र का चश्मा पड़ा रहता है… मिलता था उन दिनों एक छोटा सा फोल्डिंग कंघामिलता था उन दिनों एक छोटा सा फोल्डिंग कंघाजो जेब में पड़ा रहता था देखता जब किसी हंसीं चेहरे को“मुझे इस्तेमाल कर लो” मुझसे कहता थाभूल गया हूं उसको रखना आजकलकोट का वह हिस्सा अब खाली पड़ा रहता है…… शौक था कभी जेब में मेवे रखना काशौक था कभी जेब में मेवे रखना काउनके हर दाने के स्वाद को महसूस करने काकोट की उस जेब में अबदवाइयों का पैकेट पड़ा रहता है… मेरे कोट की जेब का सामान बदलता रहता है… घूमते थे शहर की गलियों मेंना दिन का ना रात का होश थामीलों दूर तक चलते चले जाते थेदिल में ही नहीं पैरों में भी जोश था जेब में दोस्तों के कुछ खत पड़े रहते थेकुछ अपना भी टूटे दिल का अंश पड़ा रहता थाबिछड़ गए अब कुछ दोस्तपैरों का भी जोश गयाकोट की जेब में अब रिक्शेवाले का नंबर पड़ा रहता है मेरे कोट की जेब का सामान बदलता रहता है… बूढ़ा हो गया मेरा कोटकुछ कुछ मेरे जैसा लगता हैकुछ जगह से जीर्ण कुछ थका हुआ सा लगता हैमेरी उम्र के साथ उसका नक्शा बदलता रहता है मेरे कोट की जेब का सामान बदलता रहता है…

Read More »

आज दिल मेरा उड़ता परवाज़ है…

आज दिल मेरा उड़ता परवाज़ है जो कभी थक कर था बैठा पंख कटे नहीं थे उसके फिर भी उसको यूं ही लगतारह जाऊंगा ज़मीन पर हमेशा मैं आसमान कभी छू नहीं सकता बैठा रहता था अपने पंख सिकोड़ करअपना मुंह छिपाए उनमें आसमां था तकताकमज़ोर हैं पंख मेरे मज़बूत सारा जहां हैचीलों और बाज़ों के बीच मैं अदना सा फाख्ता यही सोचता हमेशा वो आसमान तक नहीं जा सकतामानता था पर हमेशा वो एक बातवक्त से पहले किस्मत से ज़्यादा किसी को नहीं मिलतापर कोशिश मेरा काम है जो मैं नहीं छोड़ सकता बेशक आसमां बहुत दूर है मन मेरा थकान से चूर हैइतना हौसला तो हूं कर सकतागली के मोड़ तक तो हूं जा सकता धीरे-धीरे रास्तों पर चलते हुएपंखों को थोड़ी मज़बूती देते हुए वो कोशिश करना सीख गयाचीलों और बाज़ों को पीछे छोड़ते हुए वो उड़ना सीख गया आज पहुंच गया बहुत ऊपर उसी आसमान को चीरतालगता था उसको जिस तक नहीं पहुंच सकतादिल आज मेरा उड़ता परवाज़ है जो अब कभी थक कर नहीं बैठता।।

Read More »

छोटी गौरैया

रोज़ सवेरे एक गौरैया मेरी खिड़की पर आती हैज़ोर ज़ोर से चूं चूं करकेकबूतर की शिकायत लगाती है जब जाती हूं मैं बाहरतसले की तरफ उड़ जाती हैजहां बैठा होता है कबूतरउधर गर्दन घुमाती है जब भगाती हूं कबूतर कोखुशी से चहचहाती हैचुगती है दाने बाजरे केपानी में नहाती है सखियों संग उछल कूद करखूब शोर मचाती हैरोज़ सवेरे छोटी गौरैयामेरी खिड़की पर आती है।।

Read More »

वो चमक जो मशालें जला गई

उठी थी वह चमक बड़ी कमज़ोर सी बुलंद हौसलों ने ऐसी ताप दीहिला दी नींव मज़बूत दीवारों कीबुझते बुझते कईं मशालें जला गई दबी थी दिलों में चिंगारियांघरों में शोले टिमटिमा रहे थेतेज़ हवा का झोंका यूं चला गईबुझते शोलों को मशालें बना गई हौसले बुलंद थे गुनाहों केबाज़ुओं में उनकी ज़ोर थातोड़ दिए रोशनी के सूरज सभीबिखरा दिया स्याह अंधेरा चौखट का दिया बनी वो रोशनीअंधेरे को यूं छटा गईएक नहीं कईं सूरज सजा दिएकईं मशालें बुझते बुझते जला गई।।

Read More »

नींद की पीड़ा

नींद सोचती होगी कहां कैद हो गई मैं यही कहती होगी तुमसे….थोड़ा मुझे आज़ाद करोथोड़ा तो परवाज़ करो अंधेरे के गर्द में जैसेदबी हूं किसी कर्ज़ मेंथोड़ा मुझे चमकने दोथोड़ी चांदनी लेने दो थोड़ा मुझे आज़ाद करोथोड़ा तो परवाज़ करो गुम गई हूं सोने मेंतुम्हारी आंखों के हर कोने मेंकुछ तो राह समझने दोकभी तो मुझे निकलने दो थोड़ा मुझे आज़ाद करोथोड़ा तो परवाज़ करो मैं भी कभी डर जाती हूंएक ही जगह घबराती हूंऔर भी आंखें देखने दोउनको भी तो परखने दो तुम्हारे पास भी आऊंगीऔर दुनिया तो समझने दोमुझ पर यह एहसान करोथोड़ा मुझे आज़ाद करोथोड़ा तो परवाज़ करो।।

Read More »

उसकी आँखें

चेहरे पर चमक तो बहुत है और होठों पर मुस्कुराहट हमेशा रहती हैबोलती है बहुत ही संजीदा सेजैसे कानों में मिश्री घोलती है फिर भी क्यों लगता है कि कुछ छुपा रही हैमन में है कईं गम जिन्हें दबा रही हैउसकी आंखों में एक अलग सी खामोशी हैउसकी आंखें क्यों अंधेरे दिखा रही हैं देखता हूं जब भी उसको मोहब्बत की बातें करते हुएदेखता हूं जब भी उसको मुस्कुराहट बिखरते हुएउसकी आवाज़ और उसकी बातों से ऊपरकहीं ज़्यादा उसकी आंखों में खो जाता हूं आंखों के नीचे गहरे गड्ढों में जैसे सो जाता हूंबहुत गहरी हैं उसकी आंखें क्या कहना चाहती हैंलगता है मानो कईं गम के समंदर छुपाती हैं सारी मुस्कुराहट सारी मोहब्बत की उसकी बातेंउसकी आंखों के आगे बहुत खोखली पड़ जाती हैंलफ़्ज़ों से ज़्यादा उसकी आंखें मुझसे बहुत कुछ कह जाती हैं।।

Read More »

Connect With Me

12
Scroll to Top

For Parents of Kindergarten Kids

You need not worry about the academic growth of your child.
I am here to counsel you for any such issues.
-Shipra Garg-
Ex-principal Play School
M.Sc MBA