शुक्रवार, 3 अप्रैल 2020

अप्रेम

कभी हासिल करने की सोची ही नहीं....इसी लिए पाती चली गयी। 
लहर हूँ...
खुद पास आती हूँ 
खुद दूर चली जाती हूँ...
तुम्हारे साथ कोई हिसाब नहीं चलता ।
जब कभी मिल जाते हो ... पूरे पड़ते हो। 
न कम ...न ज्यादा  

शुक्रिया मेरे लिए प्रेम में भी एक अप्रेम  बनाये रखने का।

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