बुधवार, 18 सितंबर 2019

बाँसुरी....

दिल के तीन खानों में उसकी प्रेमिकाएं जीवंत रहती और चौथे खाने में वो अपने परिवार के साथ खुशी खुशी रहता था।
बचपन में एक pied piper की कहानी पढ़ी थी। साज से मंद बना देने वाली । अक्सर लगता है ये वही pied piper है जो कभी अपने राग से तो कभी स्वांग से चुहिया बहाता नहीं ...बस बना लेता है।

ख़ास बात और सबसे तारीफ़ करने वाली बात ये है कि उसके मन के कपट का पता नहीं लगता क्योंकि उसकी बनाई हुई सारी प्रेमिकाएं  जब भी खुद को आईने में देखती तो खुद को औरत और दूसरों को चुहिया ही दिखती ।
सब खुशी खुशी उसके तीन तहखानों में रमी रहती। वो जब चाहता चौथे तहखाने की खिड़की से झाँक लेता ।बस उसी पल सारी प्रेमिकाएं औरत हो जाती और वो किवाड़ बंद कर देता।

दिल धप्प से बैठता नहीं.... बंट जाता  ।सबमें बड़ा और ताज़ा तरीन टुकड़ा फिर भी चौथे खाने में ही पहुँचता ।बाक़ी तीन खानों में दिल और दिलबर होने का भरम पाले प्रेमिकाएं  रक्स करती दिन रात।

"The Pied piper " प्यार से अपनी बाँसुरी को गाहे बगाहे "कलम" कह कर चूमता रहता।

पदार्थ

पृथ्वी का सबसे तरल पदार्थ  .....स्त्री

और सबसे ठोस ?
स्त्री का मौन

सादगी

सादी सी बात सादगी से कहो न यार ....   जाने क्या क्या मिला रहे ..... फूल पत्ते   मौसम बहार सूरज चाँद रेत समंदर दिल दिमाग स...