बुधवार, 10 जुलाई 2019

बंधन

वो अद्धभुत महसूस करो
ठीक उस घड़ी जब वो सामने हो रहा हो
रुको मत
हक़ भी न जमाओ  
घुलने दो
उस पर अपना नाम न उकेरो

इस एकांत को सुनो....
अबकी जो तुम खो दोगे वो लौट कर नहीं आएगा
और वो जो छूट गया बस वही रह रह कर लौटेगा तुम्हारी परिधि में
फिर एक उदासी बन कर
दो आँसू एक हंसी रच कर

जादू होने को है
चूमते रहो इस पल की खूबसूरत उंगलियों को
सगरे प्रश्न गला दो
सारे उत्तर भी छिपा दो

एक बंधन चटकने को है
नीली स्याही से सफेद मन पर

कल्पना💐

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दुःख पारदर्शी रहे ....

ईश्वर ने आँसू को इस लिए भी कोई रंग नहीं दिया कि दुःख पारदर्शी रहे ।