शुक्रवार, 19 जुलाई 2019

स्पर्श

स्पर्श से थोड़ा अलग है प्रेम

  ले जाओ......
  गर ले सको l

 

खरा था ....कि खारा ?

जब तलक खरे हैं तालाब और कुँए तब तक ही डुबो सकते हो तुम खारा समुंदर .....

उसके बाद सिर्फ़ और सिर्फ़ वेग फूटेगा ...
वाणी से बल तक का

आक्रोश का उद्गम नहीं होता ....

बस अंत होता है...
एक विचारधारा का
एक पीड़ा का
एक साहसी का
एक चुप का

रक्त बहा क्या  ?
खरा था ....कि खारा ?

मंगलवार, 16 जुलाई 2019

अंतस से देह की बातें....

पुरुष पानी है और स्त्री पत्थर

पानी स्त्री पर निशान छोड़ता है
स्त्री पानी पर कोई निशान नहीं छोड़ती।

अंतस से देह की बातें....

सोमवार, 15 जुलाई 2019

शुक्रवार, 12 जुलाई 2019

टुकड़े ....

"मैं " हम के छोटे छोटे नुकीले हुए टुकड़े हैं  ।

शून्य..

हमें आकार लेना कभी नहीं आया
शून्य जैसा भी नहीं।

तलब...

मेरी प्यास में दखल न दे.....
यहाँ सवाल आब का नहीं तलब का है

हँसती हुई स्त्री

हँसती हुई स्त्री दुनिया में बेहद कम आँखों को बख्शी गयी हैं ...

उन ज्यादा आँखों को शिफ़ा पहुंचे।

कल्पना💐

बुधवार, 10 जुलाई 2019

बंधन

वो अद्धभुत महसूस करो
ठीक उस घड़ी जब वो सामने हो रहा हो
रुको मत
हक़ भी न जमाओ  
घुलने दो
उस पर अपना नाम न उकेरो

इस एकांत को सुनो....
अबकी जो तुम खो दोगे वो लौट कर नहीं आएगा
और वो जो छूट गया बस वही रह रह कर लौटेगा तुम्हारी परिधि में
फिर एक उदासी बन कर
दो आँसू एक हंसी रच कर

जादू होने को है
चूमते रहो इस पल की खूबसूरत उंगलियों को
सगरे प्रश्न गला दो
सारे उत्तर भी छिपा दो

एक बंधन चटकने को है
नीली स्याही से सफेद मन पर

कल्पना💐

गुरुवार, 4 जुलाई 2019

अंतर्मन

तुम मेरी अन्तर्मन वाली लिखावट हो ....
लिपि ,
भाषा,
चिन्हों
और विधाओं से मुक्त
बस मुझमें
कही ,
सुनी
और देखी जा सकने वाली

सादगी

सादी सी बात सादगी से कहो न यार ....   जाने क्या क्या मिला रहे ..... फूल पत्ते   मौसम बहार सूरज चाँद रेत समंदर दिल दिमाग स...