सोमवार, 15 अक्तूबर 2018

स्वार्थी न लगे प्रेम ......

ख़ुद से बातें करने का एक ही शौक उसे सबसे अलग करता था। उसे पल लिखने की आदत थी।वह अक्सर अपने लिए ही ख़त लिखा करता था पर उदासी उसके चाहने वालों तक पहुंच जाती थी। पते वाली जगह पर उसके तीन अक्षर वाले नाम भर ही जगह बची रहती थी पर न जाने कैसे जो कोई उसे पढ़ता वह ये सोच कर जी जाता कि उदासी उसके नाम आयी है।सब उसका नाम खुरच कर अपना नाम लिख देते थे।
उदासी के आदी लोगों को उससे अपार प्रेम था
और उसको सिर्फ़ खुद से और खुद से।
दो बार खुद से ...खुद से इसलिए लिखा कि ख़ुद से बातें करने का एक ही शौक उसे सबसे अलग करता था। उसे पल लिखने की आदत थी।वह अक्सर अपने लिए ही ख़त लिखा करता था पर उदासी उसके चाहने वालों तक पहुंच जाती थी। पते वाली जगह पर उसके तीन अक्षर वाले नाम भर ही जगह बची रहती थी पर न जाने कैसे जो कोई उसे पढ़ता वह ये सोच कर जी जाता कि उदासी उसके नाम आयी है।सब उसका नाम खुरच कर अपना नाम लिख देते थे।
उदासी के आदी लोगों को उससे अपार प्रेम था
और उसको सिर्फ़ खुद से और खुद से।
दो बार खुद से ...खुद से इसलिए लिखा कि स्वार्थी न लगे प्रेम ।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

लिपि

दुःख .... छोटी लिपि का अत्यंत बड़ा शब्द