मंगलवार, 16 अक्तूबर 2018

हमेशा....

तुमने हर बार मुझे कम दिया और मैंने हर बार उससे भी कम तुमसे लिया।

ना तुम कभी ख़ाली हुए ....
ना मैं कभी पूरी हुई।

हम यूँ ही बने रहें....हमेशा

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

लिपि

दुःख .... छोटी लिपि का अत्यंत बड़ा शब्द