सोमवार, 4 जून 2018

पता

ज़िन्दगी अपना पता कभी नहीं बताती
बस हल्दी लगी दो हथेलियां छाप देती है ....
कभी पीठ पर
कभी गालों पर


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यात्रा

प्रेम सबसे कम समय में तय की हुई सबसे लंबी दूरी है... यात्रा भी मैं ... यात्री भी मैं