सोमवार, 4 जून 2018

"आप"



रुख से नूर दे दें 
नीला सुरूर दे दें
लबों के बोल दे दें 
ख्याल अनमोल दे दें
जुबां की आवाज़ दे दें 
दिल की परवाज़ दे दें
ये हंसी भी दे दें 
सारी नमी भी दे दें
शर्मीले सब ज़ेवर दे दें 
अपनी लाल महावर दे दें
चमके चमके गौहर दे दें
अपने सारे जौहर दे दें
जब भी "हम" कभी आईने में उतरें 
वो सिर्फ "आप" हों
जो संग मेरे उभरें

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