रविवार, 24 जून 2018

जीना जो है।

स्त्री एक सभ्यता लेकर पहुंचती है।
पुरुष एक सोच लेकर निकलता है।

राह ...
दोराहा...
तिराहा...
चौराहा....

सब संयम और बर्दाश्त की बात है। 
जीना जो है।

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