सोमवार, 4 जून 2018

ज़िन्दगी

उसके जाने की खबर से , थम गयी ज़िन्दगी
 पहले ज़ार ज़ार रोई , फिर जम गयी ज़िन्दगी
मुहब्बत ही लुटाते रहे हम , उम्र भर यूँ भी
मलाल क्यों रहा , उसको कम गयी ज़िन्दगी
दो दिन ख़ुशी के , दो ही गम के
फिर ज़िन्दगी में रम गयी ज़िन्दगी
दिन के उजाले में , जी भर कर मुस्कुराई
चाँद के आगोश में , फिर सहम गयी ज़िन्दगी

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