Follow by Email

रविवार, 15 अप्रैल 2018

प्रेम

"पहले तुम" कह कर देखिये ....
सारी प्रेम कविताएं धरी की धरी रह जानी है।


फिर एक रोज़ उसकी उदासी जम जम कर काई हो गयी। इतनी ठोस कि वो उस पर पैर रख कर दूर चला गया।
उसके पैरों के निशान जब लोगों ने छू कर देखे तो उनमें कहानियां लबालब भरी हुई थी।
हर उदास कहानी सब की ज़िन्दगियों के ठीक बीचों बीच से गुजरती हुई। पुल ,नदी ,शहर ,खेत ,पहाड़ ,बालू पार कर ये लोग उस तक पहुंच ही गए .....
सिर्फ ये कहने कि ....हमें तुमसे प्यार है।
लिखो हमारे लिए कि..... उदासियाँ हमें पसंद हैं ।
रूमान के ठीक बाद वाला पायदान सिर्फ तुम बेहतरीन लिखते हो ....जादूगर

छू कर देखो ...
प्रेम दो बुलबुलों से बना एक प्यारा भरम है।
एक मैं....
एक तुम ...

प्रेम वाली तितलियों की खूब सुन ली.....
अब बस इश्क़ वाले जुगनुओं से गुफ़्तगू होगी...
चले आओ बेधड़क........
ज़िन्दगी आज मज़े में है।

सुनो चाँद !
आज चुप्पियों में शोर घोलकर पीते हैं ।
अपना coffee mug ले आओ।
आज कुछ असमानी करते हैं ।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें