Follow by Email

शनिवार, 14 अप्रैल 2018

मुस्कुराइए ... शब्द देख रहे

सुनोगे तो हँसते दुःख लगेंगे ...
बटोरोगे तो दाद और ताली
पलटोगे तो याद खाली खाली
वो सब जो लिख देते हो तुम कविता के नाम पर
सिलसिलेवार
शुक्र है ....कविता के अपने सुख हैं
और सीमाएं भी।
"कविवर" सब हो सकते हैं....
"वर्णमाला कल्पना वाली".... तो बस कविता के गले मे पड़ेगी

world poetry day .... मुस्कुराइए ... शब्द देख रहे।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें