Follow by Email

शनिवार, 21 अप्रैल 2018

नज़्म

रखी तो मैंने बेचैनियां थी कागज़ पर ....
ये बात और है .....कि एक नज़्म निकली

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें