शनिवार, 14 अप्रैल 2018

हम दोनों



इतनी बेतरतीबी से पसरे रहते हो .....
जाने के बाद भी
सुनो!
दिल ख़ाली करने का मतलब किरायेदार हो जाना नहीं होता।


तुमसे दुआओं में ही मिलते रहने का मन बना लिया है।
एक वहीं तुम आसानी से आजाया करते हो ...कभी न जा सकने के लिए।
प्रेम सहूलियत वाला भी तो होना चाह


हम दोनों के बीच एक तय दूरी हमेशा चलती है जिसमें हम दोनों कम ज्यादा होते रहते हैं ।
वो ज्यादा पास आते नहीं...... हम ज्यादा दूर जाते नहीं।


नाराज़गी कागज़ पर रख कर भेजी थी
जवाब में कुछ तितलियाँ मिली ....
स्माइली वाली
जो मेरे लबों पर ठहर गयीं ।
तुम कैसे से हो दिलबर...





शोर और सन्नाटे की बारीकियों को पढ़ लेना कविता लिख लेने जैसा ही है ....
ये बस होते हैं .... बहुतायत में
पिरोइये ...... कुछ मोती फि


बहुत इंतज़ार के बाद ...
आखिरकार इंतज़ार ने भी एक तख्ती टाँग दी आज...
Not interested any more....
better luck next time ....


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