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शनिवार, 14 अप्रैल 2018

इतना सा ही तो कहना है जिंदगी तुमसे।


अपने दुख उगाने बुझाने का सारा हुनर मुझमें है ये मान के चलने लगी हूँ ।चाहत से ज्यादा "चाह कर छोड़ देना" भी ज़िन्दगी को सुकून देता है । गज़ब वाला 😊😊
चलो एक बार फिर से अजनबी बन जाएं हम दोनों .....
इतना सा ही तो कहना है जिंदगी तुमसे।

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