Follow by Email

शनिवार, 14 अप्रैल 2018

नाख़ून

वक़्त को अपने नाख़ून बहुत पसंद हैं हमेशा से ही ....
चाहा तो सहला लिया
चाहा तो खुरच लिया
तुम बस घाव देती रहो ....ज़िन्दगी!
नए - पुराने
जाने - अनजाने
नाखून ....पनीले रहेंगे या पैनीले
वक़्त देख लेगा

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें