रविवार, 15 अप्रैल 2018

गुलाब

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वो इस लिए भी दिलकश बना रहता है क्योंकि ना कहना जानता है।
कांटे पहन लेना इतना भी आसान नहीं ......वो भी सादा सा गुलाब होकर। हूबहू तुम्हारी महक वाला।
तुम्हारी चाहना दबाना मुश्किल नहीं पर तुम्हारी महक ....
बस वही आसानी से छूटती नहीं।
पंखुड़ी पंखुड़ी महक सहेजना अब जरूरत है.... आदत तो तुम्हारी "ना types" वाली ही है ।

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