शनिवार, 14 अप्रैल 2018

वजह

सुनो! 
जो ख्वाइशें सूख जाती हैं ,उन्हें कहाँ बोते हो ?
बीज नहीं......इस बार मुझे ढ़ेर सारे फूल दबाने हैं।


इश्क़ जब जब भी तेरे लिए शाद रहा
जाने कितने ही दिलों का फ़साद रहा।

इश्क़ जैसा रंगमंच कोई नहीं...
बस किरदार टिका रहे।

जब तक साथ थी याद नहीं रखा
आज याद हूँ तो साथ नहीं रखा
तुम हमेशा से बांवरे ही थे क्या ?

बारिश गुज़र जाने के बाद वाली ओस संजोने की आदत गयी नहीं मेरी .....
देखो तुम इत्तू से आज भी बचे हो मेरे पास...
एक लंबी उम्र सिमटने के बाद भी।

मेरे ख़ास होने की महज़ इतनी सी वजह काफी है .....
कि तुम आज भी मुझे ......
इन शब्दों में खोजते हो .... यादों में नहीं .......
जो वक़्त की गिरफ्त में हुआ करती हैं
और मैं तो .....बेमौसम...... बेवक्त
तब भी हुआ करती थी और..... आज भी हूँ

हर मोड़ पर
एक नया मोड़ उगा देना ....
बस यही सीखा प्रेम में।
चेहरा नहीं ....
शख्श नहीं..... 
एक तलब की तलब
बाकी तो कटने काटने वाली बातें
ज़िन्दगी से बेहतर कौन सिखा सकता है।

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तुमने हर बार मुझे कम दिया और मैंने हर बार उससे भी कम तुमसे लिया। ना तुम कभी ख़ाली हुए .... ना मैं कभी पूरी हुई। हम यूँ ही बने रहें....हमेश...