रविवार, 15 अप्रैल 2018

प्रेम में इंतज़ार...

लाख कोशिश कर लो बांध भी तभी टूटेगा जब वेग की मर्जी होगी या बांध की हूक
प्रेम में इंतज़ार...
बांधते
गूंथते
खोलते रहो।

सिर्फ़ भूरे पंख आज भी बचे हैं ....मुझमें
गोरैया तुम कहाँ गयीं ?

बहुत ढूँढ़ा ...
शब्दों से ज्यादा महफूज़ रुमानी जगह बनी नहीं
तुम्हारे लिये !

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

यात्रा

प्रेम सबसे कम समय में तय की हुई सबसे लंबी दूरी है... यात्रा भी मैं ... यात्री भी मैं