गुरुवार, 22 जून 2017

मन्नत...

ज़िद्द नहीं हो....
 मन्नत हो

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कनेर

"कनेर"  तुम मुझे इसलिए भी पसंद हो कि तुम गुलाब नहीं हो.... तुम्हारे पास वो अटकी हुई गुलमोहर की टूटी पंखुड़ी मैं हूँ... तुम्हें दूर ...