Follow by Email

बुधवार, 30 नवंबर 2016

उम्र "
अक्सर शब्दों के रास्ते में .....रोड़ा हो जाती है
कई बार....... वो ......
कड़वा सच लिखने नहीं देती
और.....वो मीठा झूठ पढ़ने नहीं देती
रुके रुके शब्दों की अधूरी दास्तां सी.....
ये जो देख पाते हैं वो ...
या तो उम्र लांघ देते हैं
या .......शब्दों के पार चले जाते हैं
बयां हर हाल में करते हैं खुद को
क्योंकि.....
सच को सच्चा लिखा जाना जरुरी है
चाहे मुट्ठी भर पन्नों में ही सही
यही असली हुनर है
फिर उम्र चाहे कितनी बगावत करती रहे ........
कुछ शब्द मासूम ही खूबसूरत लगते हैं .....
तो फिर चलो ......
कह देते हैं इक बार फिर.....वही
लिख देते हैं.... इक बार फिर ......वही
उम्र के परे.....
शब्द के उस पार से इस पर तक
और बीच में भी ..... हर कहीं

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें