सोमवार, 10 अक्तूबर 2016

तेवर....

ख्वाइशों का क्या है ....
कभी इक मोगरे की लड़ी में भी सिमट जाती है
कभी उसे तुम भी चाहिए होते हो

Depends ....आज मेरी ख्वाइश का तेवर कैसा हैं ....☺☺☺☺☺☺

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