गुरुवार, 1 सितंबर 2016

जब तुम नहीं मिलते ....

जब तुम नहीं मिलते ....
तो खुद में ठिठक कर खड़ी हो जाती हूं ....
यहाँ वहां खो जाने से बेहतर है.......
खुद में रुक जाना

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

अद्धभुत हूँ मैं

खूबसूरत नहीं हूँ... मैं    हाँ ....अद्धभुत जरूर हूँ   ये सच है कि नैन नक्श के खांचे में कुछ कम रह जाती हूँ हर बार   और जानबूझ करआंकड़े टा...