मंगलवार, 9 अगस्त 2016

अपेक्षाएं......

तुम चाँद ......
तुम्हारे हिस्से का आसमान .....
तुम्हारी नीली चांदनी  ......
और तो और .....
ये रात भी सगरी तुम्हारी  ......
और मैं .....
मैं तो बस ........मैं  
इक दिन हो सके .....
तो मेरी अपेक्षाएं भी ......ओढ़ के देखना
बेहद ...........अलग लगोगे
सिर्फ .....इक बार 
बस .....यूं ही

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें

शुभ रात

सच कहूँ ... तुम्हारे पास मेरे सुकून का बक्सा है। उसमें तुम्हारा कुछ भी नहीं ... बस  कल्पना का सामान भरा हुआ है।कुछ तस्वीरें ,कुछ फिक्र,कुछ प...