बुधवार, 31 अगस्त 2016

प्रारब्ध....

करीब से देखोगी तो .....मुझमें शब्द मिलेंगे
और 
बेहद करीब से प्रारब्ध

कल्पना ने कल्पना से कहा .....☺☺☺☺☺

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तुमने हर बार मुझे कम दिया और मैंने हर बार उससे भी कम तुमसे लिया। ना तुम कभी ख़ाली हुए .... ना मैं कभी पूरी हुई। हम यूँ ही बने रहें....हमेश...