सोमवार, 18 जुलाई 2016

प्रश्न......

कुछ प्रश्न ...
अपने अंतस में लिए लिए फिरती हूँ ....
कभी जुबां साथ नहीं देती
कभी नैन
बेउत्तर रहती हूँ .....अमूमन
परत दर परत
प्रश्नों की परत
तुम्हारे लिए यदा कदा
मेरे लिए ही..... क्यूँ अनवरत ?

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

बिम्ब

एक शब्द लिखकर सैंकड़ों बिम्ब देखोगे? लिखो.... "प्रेम" मैं चुप थी पर चुप्पी कभी नहीं थी मेरे पास अब बस चुटकी सा दिन बचा है । अप...