सोमवार, 18 जुलाई 2016

हुनर.....

दिल खोलकर कुछ कर जाने के लिए .......
सिर्फ इक हुनर सीख लीजिये....
अपने कान बंद कर लीजिये 

हद से गुजर जाइयेगा
अपना कद बढ़ा पाइएगा

मन्नत.....

कभी तुमको .....अपने शब्दों में पिरो देना
कभी अपने शब्दों को ....तुममें कस देना

अपनी "इबादत" पर ...."मन्नत "बाँधने जैसा है

नजरिया......

कुछ गिरहें खुली रह जाएँ...... तो उलझ जाती हैं
कुछ गिरहें बंधी रह जाएँ .......तो सुलझ जाती हैं
ये शिकायत नहीं .....
शिकवा भी नहीं
नजरिया है....... मेरा

ख्वाइशें ....

कुछ ख्वाइशें ना xerox हो सकती हैं ना delete ....
वो तो बस होती हैं ....ज़िद्द सी ....खुद से

प्रश्न......

कुछ प्रश्न ...
अपने अंतस में लिए लिए फिरती हूँ ....
कभी जुबां साथ नहीं देती
कभी नैन
बेउत्तर रहती हूँ .....अमूमन
परत दर परत
प्रश्नों की परत
तुम्हारे लिए यदा कदा
मेरे लिए ही..... क्यूँ अनवरत ?

बाँसुरी....

दिल के तीन खानों में उसकी प्रेमिकाएं जीवंत रहती और चौथे खाने में वो अपने परिवार के साथ खुशी खुशी रहता था। बचपन में एक pied piper की कहानी...