रविवार, 15 मई 2016

वजह और बहाने ......

वजह तय करने ...
और
बहाने तय करने के बीच में ही ....
कई बार हमारे "ख्वाब "मर जाते हैं
क्यों ...?
कैसे ....?
और
क्यों नहीं....?
सिर्फ ये तीनों तय करते हैं कि ....
हमारे ख्वाबों की उम्र  क्या होगी ?

सोच के देखिये आप ....
सकारात्मक कश्ती में बैठे हों
या
  नकारात्मक हवाई जहाज में

वजह तय कीजिये....
बहाने अपने आप तय हो जायेंगे

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें

कनेर

"कनेर"  तुम मुझे इसलिए भी पसंद हो कि तुम गुलाब नहीं हो.... तुम्हारे पास वो अटकी हुई गुलमोहर की टूटी पंखुड़ी मैं हूँ... तुम्हें दूर ...