रविवार, 8 मई 2016

समुन्दर.....

जा जा कर लौट आना...... कोई तुमसे सीखे 
तुम कोई .....कम समुन्दर रहे हो मेरे लिए ?

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें

कनेर

"कनेर"  तुम मुझे इसलिए भी पसंद हो कि तुम गुलाब नहीं हो.... तुम्हारे पास वो अटकी हुई गुलमोहर की टूटी पंखुड़ी मैं हूँ... तुम्हें दूर ...