सोमवार, 4 अप्रैल 2016

या .....और लिखूं ?

बहुत देर तक .....
उँगलियों के बीच .....
कलम नचाते रहे
कुछ .....सोच सोच
मुस्कुराते रहे
पर .....
कुछ लम्हे .....
लफ़्ज़ों में ना बंधे ......
तो बस..... ना ही बंधे !
इतना काफी है .....
या .....और लिखूं ?

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