शुक्रवार, 15 अप्रैल 2016

संभव....

सब कुछ
जो भी कुछ संभव हो सके
बीच हमारे
उसे पाट देना
लांघ कर इस तरफ चले आना
जाने अनजाने
ही सही
बस वही ....सिर्फ वही
याद रखने लायक है  ..... है ना ?

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