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गुरुवार, 21 अप्रैल 2016

अमृता.....

आज अमृता जी को पढ़ा ....
जाना
कि जो सहज है वही सबसे कठिन
चाहे वो साहिर जी के हिस्से का खामोश प्रेम रहा हो
या इमरोज़ के हिस्से का बेबाक इश्क़

अमृता जी हम सबमें नज़र आती हैं
आज भी .....
किसी में साहिर सी
किसी में इमरोज़ सी
बेहद सहज सी
सबसे कठिन भी
क्योंकि वो प्रेम को define  नहीं करती
सिर्फ रखती है 
सिर्फ करती हैं
अपनी शर्तों पर
जिससे चाहे
जब चाहे
इसी कारण कठिन हो जाती है
सहज होते होते

हम भी तो "अमृता" से ही नज़र आते हैं
सहज से ......पर कितने कठिन

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