शुक्रवार, 22 अप्रैल 2016

कमबख्त दिल

कभी आंसूं 
गिरा डाले 
कभी अलफ़ाज़ 
बहा डाले 
हर बार "मैं "
घंटों भीगती रही 
और ये 
"कमबख्त दिल "
सिर्फ 
चंद लम्हों के लिए 
बस "हल्का" हुआ

"ये दिल " हद में है 
 या
" मैं "बेहद हूँ ?

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