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मंगलवार, 8 मार्च 2016

महिला दिवस.....

खुद में झांक कर देखें ......
आज तो .....बाकायदा हक़ के साथ
  कि ....रोज़ इक "महिला "को जीते हुए ....
  क्या अब भी कुछ "महिला" सा बचा है खुद में ?
  अगर इक क़तरा भी....
  " महिला सा " कुछ दिखता है भीतर तो .....
   आप ...."बेहद"..... हो
   आप...."बेशक"... हो
  
    "फख्र हासिल है ".....आपको
     हर अंतर पाटने का
    हर ख़ुशी बांटने का

तो चलिए मानते हैं "महिला दिवस" ...... अपनी शर्तों वाला

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