गुरुवार, 24 मार्च 2016

होली.....

होली तो अब आ रही है ...
ये ....यादों के गुब्बारे ...
मुझ पर रोज़ ही क्यों बरसते हैं?

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स्पर्श

स्पर्श से थोड़ा अलग है प्रेम   ले जाओ......   गर ले सको l