Follow by Email

गुरुवार, 24 मार्च 2016

आधा गिलास ज़िन्दगी....

मैं कहाँ कह रही हूँ ....कि खुश नहीं हूँ
पर माँ ...ये  आधी भरी आधी खाली सी ज़िन्दगी
क्यों सहेज रखी है मेरे लिए
कोख में ढँक कर 
हथेलियों में रख कर 
साँसे तो जड़ दी तूने मुझमें
माँ  ....
पर ज़िन्दगी रखना क्यों भूल रही है
ये नहीं
वो नहीं
ऐसा नहीं
वैसा नहीं
कभी नहीं
कत्तई नहीं  ....
ये "नहीं वाली परिधि"
सिर्फ तेरे लिए ....मेरे लिए क्यों ?
इतू .... इतू रोज़ जीने से अच्छा
  इतना सारा इक साथ मर जाना
चल माँ ....
या ....तो अपना आधा गिलास ज़िन्दगी उलट आएं
या ....फिर आधा गिलास ज़िन्दगी और पलट लाएं
अब अगर होगा ....तो पूरा होगा 
ये आधा ...... दोहरा नहीं होगा
या ....तो ये आसमान पूरा साफ़ होगा
या .....नहीं ही होगा 
पर ये धुंधला कोहरा तो बिलकुल नहीं होगा
अब तो सिर्फ बेहतर होगा
या .....फिर मेरा वाला बेहतरीन होगा

Let's make things right, don't make them half right.
Let's just not save, but protect the girl child.

1 टिप्पणी: