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शुक्रवार, 5 फ़रवरी 2016

" प्रश्न "हर वर्ष का .......

  आज मेरा शहर 
 बिजली में नहा रहा है,   
 हर घर नया 
 आँगन चमचमा रहा है,  
  मन कितनों ने बुहारा इस बार ? 
" प्रश्न " हर वर्ष का 
 आज भी सता रहा है 

 रिश्तों को तोहफा 
 सहला रहा है  , 
 कोई कुछ भी नहीं 
 कोई कितना कुछ पा रहा है   ,
 त्यौहार या तृष्णा का कारोबार ?
" प्रश्न" हर वर्ष का 
आज भी सता रहा है   

 किसी का आम दिन ,
 कोई लाखों उड़ा रहा है 
 कोई सिर्फ उम्मीद ,
 कोई ऐश्वर्य दिखा रहा 
 परमार्थ का इक दीप 
 मन के लिए नहीं?
" प्रश्न "हर वर्ष का 
 आज भी सता रहा है  

कागज़ में रौशनी संग 
आवाज़ बाँध रहा है  
खुद आग है  
और धमाका मांग रहा है 
खुशियां फैला ,
विष नहीं  
त्यौहार बना ...व्यापार 
" प्रश्न "हर वर्ष का 
आज भी सता रहा है  

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