शनिवार, 6 फ़रवरी 2016

हम....तुम

असमानी हर्फ़..... तुम 
बेहिसाब लफ्ज़ ....हम 
एहसास जुगनू ......तुम 
कलम रोशनाई .....हम  
इबारतें ......तमाम रात 
लिखते रहे तुम पर  
बांवरा चाँद .....तुम 
ठहरते ख्वाब  ...हम      

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मिलन......

भीग जाने के लिए मेरे पास पहाड़ बहुत थे ..... फिर तुम्हारी रेतीली आंखों से मिलना हुआ...