शनिवार, 13 फ़रवरी 2016

चिकनी ख्वाइशें .......

चिकने किरदारों सी चिकनी ख्वाइशें
हाथ लगती तो हैं हाथ आती नहीं
लकीरों ने ही सोख ली अपनी व्यथा
बेटी की माँ अब सर झुकाती नहीं
पर्दों में भी महकती है मेरी बुलंदी
हया कहती तो है ,सुनाती नहीं
पर देश भेज दी बगिया की कली
पीहर की हवा भी जहाँ जाती नहीं
रिश्तों में साँचे सी ढलती जाती
सलवटें मेरे माथे पे आती नहीं
अपना वजूद लेकर छा जाऊँगी
बंधी डोर की उड़ान भाति नहीं

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें

"कि क्या तुम मेरे प्रेम में हो?"

नदी समुंदर में गिरने से पहले पूछती है? तितली फूल को चूमने से पहले पूछती है? चिड़िया दरख़्त पर बसने से पहले पूछती है? मुस्कान चेहरे पर आने से प...