मंगलवार, 1 मार्च 2016

चाँद......

ख्वाब" ..... "चाँद" ही तो हैं
संगेमरमर सरीखे
चटक न जाएँ ....
इसलिए ...वो ................................
"ऊंची अटारी" पर रखे हैं

आसान तो नहीं है ........ख़्वाबों के उस पार जाना
जमीं पर रहकर ........अनगिनत "चाँद" पाना

पर.....

मुमकिन भी तो है .....ख़्वाबों के उस पार जाना
जमीं पर रहकर...... उस "चाँद "का दीदार पाना

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