शनिवार, 13 फ़रवरी 2016

काश.....

काश मेरे लिखे लफ़्ज़ों में वो स्पर्श आ जाये
अनमना भी पढता हुआ दिल तक सहर्ष आ जाये

उड़ते एहसासों की बस कलम को दर्श आ जाए
लिखूं जब भी कुछ ख़ास जमीं पे अर्श आ जाये

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

अद्धभुत हूँ मैं

खूबसूरत नहीं हूँ... मैं    हाँ ....अद्धभुत जरूर हूँ   ये सच है कि नैन नक्श के खांचे में कुछ कम रह जाती हूँ हर बार   और जानबूझ करआंकड़े टा...