Follow by Email

रविवार, 7 फ़रवरी 2016

हमेशा की तरह ...

मैं सुन रही हूँ.... हमेशा की तरह ...
हाँ.... ये ....जरुरी कत्तई नहीं
कि .....तुम..... बोल भी रहे हो

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें