गुरुवार, 25 फ़रवरी 2016

ड्राइविंग

कैसे समझाऊं .....कब समझोगे ?
कि "तुम"..... "मोड़" नहीं हो मेरे लिए
  तुम "पड़ाव" हो
  मेरा ठहराव हो 
  उस "डगर" पर
जो "आती - जाती "नहीं ....
सिर्फ जाकर थम जाती है
वही कहीं रम जाती है

कभी आना चाहो मुझ तलक
  तो..... इसी "रस्ते "आना
  और सुनो ! "हम" नाम की "तख़्ती" ढूंढना
  जल्दी पहुंचोगे
  बिना बूझे
इक बात और ..... मेरी तरह "सुकून" से आना
जानते तो हो ....
मुझे "शॉर्टकट्स".....
और......"रैश ड्राइविंग"से कितनी चिढ है

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