शनिवार, 6 फ़रवरी 2016

मत पूछिये.....

इस मजबूती से बंधा है मेरा वतन
क्या है डोर ,कहाँ है जोड़ ,मत 
पूछिये

इन अश्कों की दास्ताँ भी गज़ब है
पानी में दिल ,कैसे तैरता मत पूछिये

ईद होली दीवाली ,आज ही मना लो
पांच साल में ,क्या हो हाल मत पूछिये

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पूर्ण विराम

रुकने के लिए मेरे पास पूर्ण विराम भी था पर तुम ज्यादा पूर्ण थे....मेरे विराम के लिए।