शनिवार, 6 फ़रवरी 2016

मेरे लिए.....तू



शुक्रगुज़ार हूँ
तेरी पनाहों की ,
तेरे संग गुज़रती
राहों की 

मेरे लिए अनमोल
फरिश्ता है तू ,
मेरी हर ख्वाइश में
रंग भरता है तू 

तू पतंग ,
तेरी डोर हूँ मैं ,
बेफिक्र रह
सिर्फ तेरी और हूँ मैं

सज़दा उन पलों का
हम तुम्हारे हुए ,
फक्र उन लकीरों का
आप हमारे हुए 

शिकन और सुखं ,
स्वाद चखे हैं तुझ संग ,
इत्मीनान है ,सुर्ख है
हमारे इश्क का रंग

तू सीप .....
मुझे मोती सा ढांके रखना ,
अनमोल सा
"यूँ" ही आंके रखना 


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