Follow by Email

शनिवार, 13 फ़रवरी 2016

सफ़र......

सफ़र......

आइना मेरा दोस्त
परछाई सखी है 
वजूद संग आत्मा भी
सहेज कर रखी है
मैं तनहा कहाँ हूँ ?
" सफ़र" में हूँ
मेरा जरूरी सामान 
बस यही है 

कल्पना पाण्डेय 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें