सोमवार, 8 फ़रवरी 2016

अरज़....

खामोश आँखों से बस .....
देखा उन्हें जाते हुए 
 हर अरज़ ....हर उमींद 
 फर्श से उठाते हुए 
 इक बार फिर 
खुद को समझाते हुए 
 हमने लम्हों को अलविदा किया  
बे लफ्ज़ होकर  
इस बार कहीं ज्यादा .......
बेबस हो कर 

कल्पना पाण्डेय 

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यात्रा

प्रेम सबसे कम समय में तय की हुई सबसे लंबी दूरी है... यात्रा भी मैं ... यात्री भी मैं