रविवार, 14 फ़रवरी 2016

रूबरू....

ऐ समुंदर .......

बेशुमार अपनी लहरों का गुमान न रख
बेहिसाब अदाओं से रूबरू हुआ 
जो इक बार उसकी
खामोखां ......
पानी पानी हो जाएगा

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