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शनिवार, 13 फ़रवरी 2016

मैं किसके पास हूँ?.......

 आईने में होकर भी न दिखूं 
 तो मैं " ख्यालों " के पास हूँ  

 घर में होकर भी न मिलूं 
 तो मैं "यादों" के पास हूँ  

 आँखों में होकर भी न बहूं 
 तो मैं "सब्र" के पास हूँ 

  इल्म में होकर भी न कहूँ 
  तो मैं "एहसास" के पास हूँ  

  उसूलों में होकर भी न करूँ
  तो मैं "जिद्द" के पास हूँ  

  दिल में होकर भी न रहूँ 
  तो मैं "अहम्" के पास हूँ  

  साज में होकर भी न बजु
  तो मैं "शोर " के पास हूँ  

  रिश्तों में होकर भी न निभूं 
  तो मैं "परायों" के पास हूँ

  बुलंदी में होकर भी न सोऊँ
  तो मैं "तृष्णा" के पास हूँ  

 लकीरों में होकर भी न बनूँ
 तो मैं "तकदीर" के पास हूँ

 रूह में होकर भी न जीउँ
 तो मैं "मुहब्बत" के पास हूँ   

 उम्मींद में होकर भी न पाऊँ 
 तो मैं "विशवास" के पास हूँ

  मैं होकर भी ...कहीं भी न हूँ 
  तो मैं "इश्क" के पास हूँ

  जेहन में होकर भी न लिखूं 
  तो "कल्पना" के पास हूँ

 जब यहाँ कहीं ना पाओ मुझे 
 तो कह देना .....
 "खुदा" के पास हूँ मैं


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